फिर फुटपाथ पर आया ‘बाबा का ढाबा’, बंद हो गया रेस्टोरेंट

 

-आयुषी प्रधान

 

पहले लॉकडाउन से चर्चा में आए बाबा का ढ़ाबा के मालिक बुजुर्ग कांता प्रसाद एक बार फिर सोशल मीडिया में सुर्खियों में है। पहले लॉकडाउन के बाद सोशल मीडिया में छाए कांता प्रसाद ने मालवीय नगर में रेस्टोरेंट खोला था। दूसरे लॉकडाउन में बाबा का नया रेस्टोरेंट बंद हो गया है। अब बाबा अपने ढाबे को फिर से चलाने लगे हैं।

 

फिर से चर्चा में बाबा का ढ़ाबा

 

 

हालांकि, बाबा का कहना है कि उनके पास पैसे की कमी नहीं है, मगर अब बाबा की सहायता के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियों वायरल होने के बाद बाबा का ढाबा एक बार फिर से चर्चा में बना हुआ है। यू-ट्यूबर गौरव वासन ने अक्टूबर 2020 में बाबा का ढ़ाबा का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया था।

 

बाबा रातों-रात लोगों के बीच प्रसिद्घ हो गए थे। वीडियों में बाबा (कांता प्रसाद) अपने ढ़ाबे पर खाने की बिक्री न होने की वजह से दुखी थे और वीडियों में अपनी समस्या बताते हुये रोने लगे। इस वीडियों को लोगो ने सोशल मीडिया पर जोरों से वायरल किया और कांता प्रसाद की मदद के लिए लोगों की भीड़ मालवीय नगर स्थित बाबा के ढ़ाबा पर जुटने लगी।

 

नेता से लेकर अभिनेताओं ने बाबा का ढाबा के सर्मथन में ट्वीट किये और उनकी मदद के लिए लोगों को आगे आने के लिए प्रेरित किया। बताया जा रहा है कि बाबा को सहायता के रूप में 40 लाख से ज्यादा रुपये मिले थे। दो महीने के अंदर बाबा कांता प्रसाद ने 5 लाख रुपये लगाकर मालवीय नगर में अपने पुराने ढाबे से कुछ ही दूरी पर एक रेस्टोरेंट खोला। वहां पर एक कुक, वेटर और सिक्योरिटी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाये।

 

बाबा ने फरवरी 15 को बंद किया अपना रेस्टोरेंट

 

 

बुजुर्ग कांता प्रसाद ने बताया कि उन्हें अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। लागत के अनुसार खर्चा न निकलने पर बाबा ने फरवरी 15 को अपना रेस्टोरेंट बंद कर दिया और वापस अपने उसी पुराने ढ़ाबे पर पहुंच गए हैं।बाबा ने बताया कि मासिक खर्च लगभग 1 लाख रुपये था, जबकि औसत मासिक बिक्री कभी 40,000 रुपये से अधिक नहीं हुई। कांता प्रसाद के खर्चे में 35000 रुपये रेस्टोरेंट का किराया, 36000 रुपये तीन कर्मचारियों की सैलरी और 15 हजार रुपये राशन, बिजली और पानी के लिए शामिल था।

 

रेस्टोरेंट पर धीरे-धीरे ग्राहकों का आना कम होता गया और रेस्टोरेंट का खर्चा बढ़ने लगा। इसके बाद बाबा को अपना रेस्टोरेंट बंद करना पड़ा। वह बताते हैं कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से 17 दिनों के लिए पुराने ढाबे को बंद करना पड़ा।

 

 

 

 

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