एक ऐसा भी स्थान जहाँ लगता है खिचड़ी मेला, जानिए क्या है इसके पीछे का महत्व?

Khichdi fair

 

 

-अक्षत सरोत्री

 

14 जनवरी को मकरसक्रांति का एक (Khichdi fair) अलग ही महत्व है। इस दिन देशभर में खिचड़ी बनाई जाती है बांटी जाती है। हर स्थान का अलग-अलग महत्व है। कहीं खिचड़ी बनाई जाती है तो कहीं तिल से बनी चीजों का महत्व होता है। ये भी कहा जाता है कि इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है। लोग इस दिन काफी दान और पूजा करते हैं।

 

 

गोरखनाथ मंदिर से है इस परम्परा का संबंध

 

 

वहीं उत्तर प्रदेश के गोरखनाथ मंदिर में भी एक परंपरा सालों से चली आ रही है। गोरखनाथ मंदिर-गोरखनाथ मंदिर गोरखपुर में स्थित है। इस जिले का (Khichdi fair) नाम बाबा गोरखनाथ के नाम पर रखा गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान में पीठाधीश्वर हैं। पीठाधीश्वर के रूप में मकर संक्रांति पर तड़के पहली खिचड़ी योगी आदित्यनाथ ने चढ़ाई। परंपरागत रूप से मनाई जाने वाली मकर संक्रांति की शुरूआत की।

 

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ये खिचड़ी मेला देश के बड़े आयोजनों में है शामिल

 

 

ये खिचड़ी मेला (Khichdi fair) देश के बड़े आयोजनों में शामिल है। जहां घंटों पहले ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगती है। देश के अलग-अलग राज्यों से यहां श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। नेपाल से भी यहां श्रद्धालु खिचड़ी चढ़ाने आते हैं। ये मेला महीने भर चलता है। रविवार और मंगलवार के दिन का खास महत्व होता है। इन दिनों मंदिर में भारी भीड़ नजर आती हैं।

 

 

इस मेले के पीछे की मान्यता

 

 

मान्यता है कि त्रेता युग में सिद्ध गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन करते हुए हिमाचल के कांगड़ा जिले के ज्वाला देवी मंदिर गएं यहां देवी प्रकट हुईं और गुरु गोरक्षनाथ को भोजन का आमंत्रण दिया। वहां तामसी भोजन देखकर गोरक्षनाथ ने कहा, मैं भिक्षाटन में मिले चावल-दाल को ही ग्रहण करता हूं। इस पर ज्वाला देवी ने कहा, मैं चावल-दाल पकाने के लिए पानी गरम करती हूं। आप भिक्षाटन कर चावल-दाल लाइए। गुरु गोरक्षनाथ यहां से भिक्षाटन करते हुए हिमालय की तराई स्थित गोरखपुर पहुंचे। उस समय इस इलाके में घने जंगल थे। यहां उन्होंने राप्ती और रोहिणी नदी के संगम पर एक मनोरम जगह पर अपना अक्षय भिक्षापात्र रखा और साधना में लीन हो गए। इस बीच खिचड़ी का पर्व आया। एक तेजस्वी योगी को साधनारत देख लोग उसके भिक्षापात्र में चावल-दाल डालने लगे, पर वह अक्षयपात्र भरा नहीं। इसे सिद्ध योगी का चमत्कार मानकर लोग अभिभूत हो गए।

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