सिटी बैंक से हुई ये बड़ी गलती, 3,650 करोड़ का हुआ नुकसान

 

देश के प्रमुख बैंको में शामिल होने वाले सिटी बैंक (CITI BANK)  ने एक गलत ट्रांसफर कर दिया जिसकी वजह से बैंक को हजारों या लाखों का नहीं बल्कि करोड़ो का नुकसान झेलना पड़ा. दरअसल, कास्मेटिक कंपनी रेवलॉन के ऋणदाताओं को सिटी बैंक को 58 करोड़ रुपये बतौर ब्याज देने थे, लेकिन गलती से बैंक की ओर से ऋणदाताओं के खाते में दस गुना से अधिक 6554 करोड़ रुपये (करीब 900 डॉलर) डाल दिए गए। यह लेनदेन पिछले साल अगस्त में हुआ था.

 

कुछ कर्जदाताओं ने तो बैंक के पैसे लौटा दिए, लेकिन जब दस ऋणदाताओं से 3650 करोड़ रुपये (करीब 50 करोड़ डॉलर) वापस नहीं आए तो अमेरिकी बैंक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जहां से उसे निराशा ही हाथ लगी. सिटीबैंक रेवलॉन और उसके कर्जदाताओं के बीच एजेंट की भूमिका अदा कर रहा था.

अमेरिका की एक अदालत ने अजब मामले में गजब फैसला सुनाते हुए कहा कि बैंक अब शेष रकम वसूल नहीं सकता है.

 

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न्यूयॉर्क में इस तरह के मामले के लिए अलग कानून है, ‘डिस्चार्ज फॉर वैल्यू डिफेंस’. इसके तहत अगर लाभार्थी किसी रकम का लेनदार है और बैंक की ओर से भले ही गलती से उसे वह रकम दे दी गई हो तो वह उसे रख सकता है. इस मामले में कर्जदाताओं ने कहा कि उन्हें लगा कि बैंक ने उनके कर्ज की अदायगी करनी शुरू कर दी है। इसलिए लेनदेन को गलती नहीं मान सकते .

 

2012 -13 में भारतीय बैंक से भी हुई थी गलती – 

 

भारत के एक शीर्ष सरकारी बैंक से भी इस तरह की गलती हुई थी, जिसमें बैंक ने गलती से कई खातों में ब्याज का भुगतान कर दिया था. लेकिन इस मामले में तुरंत मानक संचालन प्रक्रिया शुरू की गई और लेनदेन को रद्द कर दिया गया था। पूरी रकम बैंक के पास वापस आ गई थी और कोई नुकसान नहीं हुआ था .

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