आज पंचतत्व में विलीन होंगे देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, जानिए अंतिम संस्कार से जुड़े हर जरूरी सवाल का सीधा जवाब

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रवि श्रीवास्तव

देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर 7 दिन के राजकीय शोक की घोषणा केंद्र सरकार ने कर दी है, देश के लोकप्रिय और सर्वाधिक सम्मानित नेताओँ की सूची में आने वाले प्रणब मुखर्जी ने सेना के  ‘रिसर्च ऐंड रेफ्रल हास्पिटल में 84 साल की उम्र में अंतिम सांस ली, अब आज यानि मंगलवार को उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा, पूर्व राष्ट्रपति को अंतिम विदाई देने के लिए समय निर्धारित हो गया है

परिवार के मुताबिक पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन उनके निवास स्थान होंगे, प्रणब मुखर्जी को मुखाग्नि दिल्ली के श्मशान घाट में दी जाएगी

कहां होंगे प्रणब मुखर्जी के अंतिम दर्शन –   उनके निवास स्थान पर

पूर्व राष्ट्रपति का निवास स्थान कहां है   – 10, राजाजी मार्ग, नई दिल्ली

कब दर्शन कर सकते हैं – आज 1 सितंबर को

कब से कब तक – सुबह 11.00 से 12.00 बजे तक

अंतिम संस्कार कब होगा- मंगलवार दोपहर 2 बजे

कहां होगा अंतिम संस्कार- लोधी रोड श्मशान घाट में होगा

गृह मंत्रालय से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक दिवंगत सम्मानीय नेता के सम्मान में भारत में 31 अगस्त से लेकर छह सितंबर तक राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान देश भर में उन सभी भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा जहां ध्वज लगा रहता है। मुखर्जी 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति थे।

प्रणब मुखर्जी का ऐसा था कद

देश के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दिखने में सीधे सीधे और सरल नजर आते थे उनका व्यक्तिव उतना ही विराट था। यूपीए के कार्यकाल में प्रणब दा का कद पीएम से कम नहीं था। राजनीति के माहिर ये भी बताते हैं कि उन्हें एक दौर प्रधानमंत्री बनने की रेस में सबसे आगे माना जाता था, लेकिन वो बन नहीं पाए। प्रणब मुखर्जी की खूबी ये थी कि वो पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम वही करते थे। चाहे यूपीए 1 के दौरान विश्वास मत लेने का मसला हो या 2011 में अन्ना मूवमेंट से निपटना रहा हो, प्रणब ही सरकार-पार्टी को गाइड करते रहे

 

इसके आलावा भी पूर्व राष्ट्रपति और राजनीति के अजातशत्रु कहे जाने वाले प्रणब मुखर्जी के विराट व्यक्तिव को ऐसे भी समझा जा सकता है कि उनके निधन पर शोक जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह तस्वीर ट्वीट की जिसमें वह प्रणब मुखर्जी के पैर छूते नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा कि प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर उनका परामर्श मैं कभी भी नहीं भूल पाऊंगा

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