मंदिर में निभाई जाती है अनोखी परंपरा, एक-दूसरे पर आग बरसाकर पूरी होती है मनोकामना

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-नीलम रावत, संवाददाता

 

भारत में विभिन्न मंदिर है जहां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती है. मनोकामना के लिए भक्तों को कई अनोखे परंपराएं भी निभानी पड़ती है. एक ऐसा ही मंदिर दक्षिण भारत में मौजूद है. जहां भक्तों को मन्नतें पूरी करवाने के लिए एक-दूसरे पर आग बरसानी पड़ती है.

 

 

ये मंदिर कर्नाटक राज्य के कातील में स्थित है. कातील मैंगलोर से 26 किलोमीटर की दूरी पर है. यहां देवी मां का मंदिर दुर्गा परमेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है.

 

 

आग बरसाने से पूर्ण होती है मनोकामना 

 

मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर में सदियों से अग्नि केलि नाम की परंपरा चली आ रही है, जिसमें लोग अपनी जान की परवाह किए बिना एक-दूसरे पर आग फेंकते हैं. यह परंपरा यहां के लोग उत्सव के तौर पर 8 दिनों तक मनाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है.

 

 

इस मंदिर में ये परंपरा दो गांव आतुर और कलत्तुर के लोगों के बीच में होती है. परंपरा का यह उत्सव शुरु होने से पहले देवी मां की शोभा यात्रा निकाली जाती है और उसके बाद तालाब में डुबकी लगाई जाती है. तालाब में डुबकी लगाने के बाद ही दोनों गांवों के लोगों के बीच अलग-अलग दल बना लिए जाते हैं. दल बनाने के बाद हाथों में नारियल की छाल से बनी मशाल लेकर एक दूसरे के सामने खड़े हो जाते हैं. मशालों जला दिया जाता है और फिर इन जलती मशालों को एक-दूसरे पर फेंका जाता है.

 

परंपरा को लेकर मान्यता

 

एक-दूसरे पर आग फेंकने की इस परंपरा को लेकर लोगों का कहना है की यह परंपरा व्यक्ति के दुख को दूर करने में मदद करती है. इस परंपरा से किसी भी व्‍यक्ति को ना तो आर्थिक और ना ही कोई शारीरिक समस्या होती है. इस खेल में शामिल होने वाले हर शख्स के दुख को मां दुर्गा दूर कर देती है.

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