ओडिशा विस में किसानों के मुद्दे पर हंगामा, सदन की कार्यवाही 11.30 बजे तक के लिए स्थगित

Odisha Assembly
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भुवनेश्वर, 25 नवंबर (वार्ता): ओडिशा (Odisha) विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शुक्रवार को किसानों के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही को 11.30 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

आज सुबह साढ़े दस बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्य सब्सिडी मुद्दे, मंडी समस्या और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुद्दे को लेकर सदन के बीचोंबीच आ गए और बीजू जनता दल (बीजद) सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

विपक्ष के विरोध के जवाब में बीजद सदस्य भी सदन के बीचोंबीच आ गए और धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे।

विपक्ष के विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास पहुंचने के कारण कामकाज बाधित हुआ और सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

विधानसभा अध्यक्ष बी के अरुख ने विपक्षी सदस्यों को अपनी सीटों पर बैठने और शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाने की अपील की, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़े रहे, जिसके बाद अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही साढ़े ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद बीजद के सदस्य धान की एमएसपी बढ़ाकर 2,930 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग को लेकर विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास गए धरने पर बैठ गए।

सरकार के मुख्य सचेतक प्रशांत कुमार मुदुली ने कहा कि ओडिशा विधानसभा ने धान का एमएसपी बढ़ाकर 2,930 रुपये प्रति क्विंटल करने के लिए सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने इसे लागू नहीं किया।

Odisha: राज्य के किसानों को बहुत नुकसान हो रहा है

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ओडिशा को उर्वरकों की आपूर्ति में भेदभाव कर रही है जिसके कारण राज्य के किसानों को बहुत नुकसान हो रहा है और किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत बीमा लाभ से भी वंचित हैं। विपक्षी सदस्य भी अपनी मांगों को लेकर गोपबंधु की प्रतिमा के पास धरने पर भी बैठ गए।

भाजपा के मुख्य सचेतक मोहन मांझी ने बीजद सरकार पर आरोप लगाया कि उसने पश्चिमी ओडिशा के जिलों को सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया जिससे किसानों को पीएमएफबीवाई के बीमा लाभ से वंचित होना पड़ा। श्री मांझी ने कहा कि विपक्ष सदन में किसानों के मुद्दे पर एक प्रस्ताव पर चर्चा करना चाहता था, लेकिन अध्यक्ष ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा घोषित प्रति क्विंटल धान के लिए 100 रुपये का बोनस अभी तक किसानों को नहीं दिया गया है और राज्य सरकार ने हाल ही में पदमपुर विधानसभा उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए 200 करोड़ रुपये की इनपुट सब्सिडी की घोषणा की है, जो कि वोट बैंक की राजनीति के अलावा कुछ नहीं है।
श्री मांझी ने यह भी आरोप लगाया कि मिल मालिकों और अधिकारियों के बीच अनैतिक सांठगांठ होने के कारण प्रति वर्ष धान की खरीद में 3,000 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार होता है, जिससे किसानों को धान की बिक्री करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

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