चीन की अमेरिका को नसीहत, अलगाववादी ताकतों का समर्थन न करे यूएस

US China

 

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

चीन और अमेरिका (US China) के बीच तकरार आज की नहीं है काफी पुरानी है। अक्सर कई बड़े मंचों पर दोनों देशों के बीच नोकझोक हो जाती है। यह देश अक्सर एक दूसरे पर जमकर बयानबाज़ी करते हैं। चीन ने सोमवार को अमेरिका से सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी एक दलीय राजनीतिक प्रणाली को ‘बदनाम’ नहीं करने और ताइवान, तिब्बत, हांगकांग एवं शिनजियांग में ‘अलगाववादी ताकतों’ का समर्थन नहीं करने की अपील की।

 

पुडुचेरी के रूप में मजबूत गढ़ तो खोया ही साथ में दक्षिण से हुई विदाई- राजनितिक विश्लेषण

 

 

चीन के विदेशमंत्री ने जारी किया बयान

 

 

चीन-अमेरिका (US China) संबंध के विषय पर आयोजित वार्षिक ‘लैंटिंग फोरम’ में विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि बाइडन प्रशासन को अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन कठोर नीतियों पर विचार करना चाहिए जिसे उन्होंने चीन के बढ़ते प्रभाव पर लगाम लगाने के लिए उठाया था। वांग ने कहा, ‘हमारी मंशा अमेरिका को चुनौती देने या उसे हटाने की नहीं है। हम शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए तैयार हैं और अमेरिका के साथ साझा विकास चाहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इसी तरह हम आशा करते हैं कि अमेरिका चीन के बुनियादी हितों, राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और विकास के अधिकार का सम्मान करेगा।

 

 

मिलजुल कर काम करने की दे डाली हिदायत

 

हम अमेरिका से सीपीसी (US China) और चीन की राजनीतिक प्रणाली को बदनाम नहीं करने, उसके खिलाफ गलत शब्दों से बचने का अनुरोध करते हैं।’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘साथ ही हम चाहते हैं कि अमेरिका ताइवान की आजादी की मांग करने वाले अलगाववादी ताकतों का समर्थन नहीं करे तथा हांगकांग, शिनजियांग एवं तिब्बत से संबंधित चीन के आंतरिक मामलों में उसकी संप्रभुता एवं सुरक्षा को कमतर करना बंद करे।’ उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि अमेरिका जल्द से जल्द उसकी नीतियों को ठीक करेगा।

 

दोनों देशों में इन मुद्दों में है टकराव

 

 

दोनों देशों के बीच कोरोना (US China) वायरस महामारी के उद्भव, दक्षिण चीन सागर में बढ़ती सैन्य गतिविधि और मानवाधिकार समेत कई मुद्दों को लेकर टकराव चल रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने 11 फरवरी को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से करीब दो घंटे से अधिक बात की थी और कहा था कि चीन के मानवाधिकार उल्लंघन का नतीजा ठीक नहीं होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि संवेदनशील मुद्दों के प्रभावी समाधान के लिए उन्हें हर क्षेत्र में व्यापक बातचीत करनी चाहिए।

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *