उत्तराखंड फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में, 150 लोग लापता, जानिए पूरा मामला

Uttarakhand

 

 

-अक्षत सरोत्री/धीरेन्द्र प्रताप, देहरादून

 

यूँ तो उत्तराखंड (Uttarakhand) को देवभूमि के नाम से जाना जाता है। लेकिन अगर आपदा की बात की जाए तो कई ऐसे मौके देखे गए हैं जब उत्तराखंड को त्रासदी ने अपनी चपेट में लिया हो। 2013 में भी हमने देखा था जब केदारनाथ में कुदरत का कहर देखने को मिला था। वो शहर अब बसा दिया गया है लेकिन अभी भी कई ऐसी कड़वी यादें जो 2013 की केदारनाथ त्रासदो को याद दिलाती हैं। आज चमोली के जोशीमठ में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को बर्फ का ग्लेशियर टूट गया। इसके बाद धौलीगंगा नदी में जल स्तर अचानक बढ़ गया। उत्तराखंड के मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि आपदा में 100 से 150 लोगों के लापता होने की आशंका है।

 

 

 

 

 

ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट हुआ तहस-नहस

 

 

चमोली के तपोवन (Uttarakhand) इलाके में हुई इस घटना से ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट को काफी नुकसान पहुंचा है। यहां काम करने वाले कई मजदूर लापता हैं। नदी के किनारे बसे कई घर पानी में बह गए हैं। आसपास के गांवों को खाली कराया जा रहा है। ऋषिगंगा के अलावा एनटीपीसी के भी एक प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचा है। तपोवन बैराज, श्रीनगर डैम और ऋषिकेश डैम भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

 

 

 

 

 

जून 2013 को नहीं भुला है कोई

 

16-17 जून 2013 को बादल फटने से रुद्रप्रयाग, चमोली, (Uttarakhand) उत्तरकाशी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ जिलों में भारी तबाही मची थी। इस आपदा में 4,400 से अधिक लोग मारे गए या लापता हो गए थे। 4,200 से ज्यादा गांवों का संपर्क टूट गया। इनमें 991 स्थानीय लोग अलग-अलग जगह पर मारे गए। 11,091 से ज्यादा मवेशी बाढ़ में बह गए या मलबे में दबकर मर गए। ग्रामीणों की 1,309 हेक्टेयर भूमि बाढ़ में बह गई। 2,141 भवनों का नामों-निशान मिट गया। 100 से ज्यादा बड़े व छोटे होटल ध्वस्त हो गए। आपदा में नौ नेशनल हाई-वे, 35 स्टेट हाई-वे और 2385 सड़कें 86 मोटर पुल, 172 बड़े और छोटे पुल बह गए या क्षतिग्रस्त हो गए थे।

 

 

 

 

एसडीएम कुमकुम जोशी ने यह दी जानकारी

 

 

जोशीमठ की एसडीएम कुमकुम जोशी ने कहा कि तपोवन (Uttarakhand) में एनटीपीसी और ऋषि गंगा का पूरा प्रोजेक्ट बर्बाद हो चुका है। पूरी नदी मलबे में तब्दील हो गई है और मलबा धीरे धीरे बह रहा है। चमोली, देवप्रयाग और सभी नदी किनारे बसे गांव के प्रशासन को जानकारी दे गई है। वहां काम कर रहे कुछ लोगों को चोटें आईं हैं।

 

 

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र रावत ने दी यह जानकारी

 

 

ग्लेशियर फटने से वहां बन रहे बांध को क्षति पहुंची है। मानवक्षति के बारे में अभी अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। पानी की तीव्रता चमोली (Uttarakhand) तक आते-आते काफी कम हो गई है। गृह सचिव से मेरी बात हो गई है और गृह मंत्री से थोड़ी देर में बात करूंगा। उत्तराखंड सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि अलकनंदा का जलस्तर अब सामान्य से 1 मीटर ऊपर है लेकिन बहाव कम हो रहा है। उत्तराखंड सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि अगर आप प्रभावित क्षेत्र में फंसे हैं और आपको किसी तरह की मदद की जरूरत है तो आपदा परिचालन केंद्र के नम्बर 1070 या 9557444486 पर संपर्क करें। कृपया घटना के बारे में पुराने वीडियो से अफवाह न फैलाएं। वहीं एनडीआरएफ के 200 जवानों को भेजा गया है। वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में उत्पन्न हुई प्राकृतिक आपदा से निपटने हेतु उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

 

 

अमित शाह और पीएम की पूरी नजर

 

 

 


पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह उत्तराखंड (Uttarakhand) में ग्लेशियर टूटने के बाद हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिन्होंने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से बातचीत की। पीएम मोदी ने सीएम को हर संभव मदद का भरोसा दिया।

 

Share

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *