जिस Pegasus पर इतना बवाल मचा हुआ है, वह आखिर है क्या और कैसे काम करता है?

 

-आयुषी प्रधान

 

What is Pegasus Spyware of NSO Group: संसद के मॉनसून सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा और दोनों सदनों को आखिरकार स्थगित करना पड़ा. संसद सत्र शुरू होने के एक दिन पहले रविवार को एक जासूसी कांड के सामने आने के कारण संसद के भीतर और बाहर सोमवार को हंगामा होता रहा. रिपोर्ट्स के मुता​बिक, एक वैश्विक सहयोगी जांच प्रोजेक्ट से पता चला है कि इजरायली कंपनी, एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर से भारत में 300 से अधिक मोबाइल नंबरों को टारगेट किया गया, जिसमें वर्तमान सरकार के दो मंत्री, तीन विपक्षी नेता, एक जज, कई पत्रकार और कई व्यवसाई शामिल हैं.

 

 

हालांकि, बताया जा रहा है कि डेटाबेस में फोन नंबर की मौजूदगी इस बात की पुष्टि नहीं करती है कि संबंधित डिवाइस पेगासस से संक्रमित हुए या सिर्फ हैक करने का प्रयास किया गया. विपक्ष ने इस कांड पर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की और कई आरोप लगाए. वहीं सरकार ने कहा है कि लोगों पर सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार या इससे जुड़ा कोई सच नहीं है.

 

सोमवार को पेगासस.. पेगासस स्वाइवेयर… पेगासस जासूसी कांड… वगैरह कई शब्द विपक्ष के नेताओं से लेकर सरकार के मंत्रियों की जुबां पर छाए रहे और उनके इर्द-गिर्द घूमते रहे. ज्यादातर लोगों ने पेगासस का नाम पहली बार सुना. हो सकता है शायद आपने भी इससे पहले पेगासस का नाम नहीं सुना होगा. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये पेगासस है क्या, यह कैसे काम करता है और पूरा बवाल क्या है?

 

पेगासस (Pegasus) क्या है?

 

 

पेगासस एक तरह का स्वाइवेयर (SpyWare) है. सभी स्पाइवेयर वही करते हैं जो नाम से पता चलता है– वे लोगों के फोन के जरिए उनकी जासूसी करते हैं. PBNS की रिपोर्ट के मुताबिक, पेगासस एक लिंक भेजता है और यदि उपयोगकर्ता लिंक पर क्लिक करता है, तो उसके फोन पर मैलवेयर या निगरानी की अनुमति देने वाला कोड इंस्टॉल हो जाता है. बताया जा रहा है कि मैलवेयर के नए संस्करण के लिए किसी लिंक पर क्लिक करने की भी आवश्यकता नहीं होती है. एक बार पेगासस इंस्टॉल हो जाने पर, हमलावर के पास उपयोगकर्ता के फोन की पूरी जानकारी होती है.

 

पेगासस क्या कर सकता है, कैसे करता है?

 

 

सिटीजन लैब पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पेगासस “लोकप्रिय मोबाइल मैसेजिंग ऐप से पासवर्ड (Password), संपर्क सूची (COntact List), कैलेंडर ईवेंट, टेक्स्ट संदेश (Text Massage) और लाइव वॉयस कॉल (Live Voice Call) सहित यूजर्स के निजी डेटा को चुरा सकता है”. निगरानी के दायरे का विस्तार करते हुए, फोन के आसपास की सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए फोन कैमरा और माइक्रोफोन को चालू किया जा सकता है.

 

फेसबुक द्वारा अदालत में दिए गए बयान के अनुसार ये मैलवेयर ईमेल, एसएमएस, लोकेशन ट्रैकिंग, नेटवर्क विवरण, डिवाइस सेटिंग्स और ब्राउजिंग हिस्ट्री डेटा तक भी पहुंच सकता है. यह सब उपयोगकर्ता की जानकारी के बिना होता रहता है.

 

ये मैलवेयर पासवर्ड से सुरक्षित उपकरणों तक में पहुंचने की क्षमता रखता है. जहां इंस्टॉल किया गया उस डिवाइस पर कोई निशान नहीं छोड़ना, कम से कम बैटरी, मेमोरी और डेटा की खपत ताकि उपयोगकर्ता को संदेह पैदा न हो, जोखिम की स्थिति में स्वयं से अनइंस्टॉल होना, गहन विश्लेषण के लिए किसी भी डिलीट की गई फाइल को पुनः प्राप्त करने की क्षमता भी इस मैलवेयर में है.

 

भारत सरकार का पूरे मामले पर क्या कहना है?

 

 

सरकार ने कहा है कि लोगों पर सरकारी निगरानी के आरोपों का कोई ठोस आधार या इससे जुड़ा कोई सच नहीं है. पहले भी, भारत सरकार द्वारा वॉट्सऐप पर पेगासस के उपयोग के संबंध में इसी तरह के आरोप लगाए गए थे. उन रिपोर्टों का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था. तब इसका सभी पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से खंडन किया गया था, जिसमें भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में व्हाट्सएप के द्वारा किया गया खंडन भी शामिल था. इसी प्रकार, यह मीडिया रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं को बदनाम करने के लिए अनुमानों और अतिशयोक्ति पर आधारित प्रतीत होती है.

 

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