राजस्थान में भाजपा और बसुंधरा क्यों हैं आखिर आमने-सामने?, राजनितिक विश्लेषण

BJP and Basundhara

 

-अक्षत सरोत्री

 

 

कुछ महीने पहले सभी ने देखा होगा कि राजस्थान कांग्रेस में गहलोत और पायलट के बीच जमकर खींचतान चल रही थी उस समय कांग्रेस तो जैसे तैसे संभल गई लेकिन अब यही खींचतान भाजपा में शुरू हो गई है। कुछ विधायक और बसुंधरा राजे (BJP and Basundhara) अब आमने-सामने हैं। अब यह किसी गुटबाज़ी का नतीजा है या फिर आने वाले समय में अपनी उपयोगिता बताने का खेल यह तो तभी पता चल सकेगा जब इस सबका कारण समझ आएगा।

 

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वसुंधरा राजे की अनदेखी से खफा है कुछ विधायक

 

वसुंधरा राजे (BJP and Basundhara) को फिर पार्टी कमान सौंपने के लिए बीजेपी के कई विधायकों ने मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। चिंतन बैठक कर इन लोगों ने साफ कर दिया की वसुंधरा राजे की अनदेखी पार्टी के लिए महंगी पड़ सकती है। उधर वर्तमान प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सतीश पुनिया का कहना है कि राज्य में चल रही इस गुटबाजी पर केन्द्रीय नेतृत्व की निगाहें हैं और वक्त आने पर सही फैसला लिया जाएगा।

 

 

अंदरूनी फूट होने लगी है उजागर

 

 

बीजेपी की अंदरूनी फूट (BJP and Basundhara) अब सतह पर उजागर होने लगी है। कोटा में बीजेपी समर्थित धड़ा खुलकर सामने आ गया है। यूं तो वसुंधरा राजे की वर्तमान राजस्थान बीजेपी नेताओं से नाराजगी और उसके चलते पनप रही गुटबाजी की बातें सामने आती रही है लेकिन कोटा सम्भांग में बीजेपी के बड़े नेताओं की हुई चिंतन बैठक में खुलकर वसुंधरा राजे को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की बात ने सबको चौंका दिया।

 

यह विधायक उठा रहे हैं बसुंधरा के पक्ष में आवाज

 

 

कोटा के बड़े बीजेपी नेता भवानी सिंह राजावत और प्रहलाद गुंजल जैसे नेताओं की मौजूदगी में बीजेपी राजनीतिक चिंतन शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें साफ कहा गया कि वसुंधरा राजे की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष से इस बारे में पूछे गए सवाल पर पहले तो उन्होंने वसुंधरा राजे सहित किसी भी नेता की पार्टी में उपेक्षा नहीं किये जाने का दावा किया लेकिन यह भी संकेत दे दिया की इस तरह की गुटबाजी बढ़ाने वाली गतिविधियों पर पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व पूरी तरह निगाहें रखे हुए है।

 

प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया ने दिया अपना पक्ष

 

 

प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया का कहना कि बीजेपी कार्यकर्ताओं (BJP and Basundhara) की पार्टी है और सब मिलजुल कर ही कोई फैसला लेते हैं। हमारे यहां किसी भी अनदेखी नहीं होती है और पार्टी जो जिम्मेदारी सौंपती हैं उसे हम सभी मिलकर पूरा करते हैं। वैसे पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व ऐसे सभी घटनाक्रमों पर निगाह रखे हुए हैं और वह सही वक्त पर सही फैसला लेगा। वैसे तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का केन्द्रीय नेतृत्व से टकराव जगजाहिर है। विधानसभा चुनावों में बीजेपी की हार के बाद लगातार उनके हाशिये पर आने की खबरें भी सामने आ रही थी।

 

सतीश पुनिया का अध्यक्ष बनना बसुंधरा को मंजूर नहीं?

 

 

यहां तक की उनकी मर्जी के खिलाफ सतीश पुनिया को राजस्थान बीजेपी (BJP and Basundhara) की कमान सौंप दी गयी और सतीश पुनिया ने भी वसुंधरा की सलाह को दरकिनार करते हुए अपनी टीम भी खड़ी कर दी। सतीश पुनिया पर आरोप है कि उन्होंने वसुंधरा समर्थकों को किनारे लगा दिया। वसुंधरा के समर्थकों का आरोप है कि पार्टी का आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो रहा है। लेकिन तय है की वसुंधरा राजे सिंधिया का कोई विकल्प नहीं है।

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