फ्यूचर ग्रुप के साथ रिलायंस की 3.4 बिलियन डॉलर डील क्यों है अमेज़ॅन के लिए नया सिरदर्द

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-कशिश राजपूत

 

अमेज़ॅन (Amazon) दुनिया का सबसे बड़ा ई-कॉमर्स (E-Commerce) मार्केटप्लेस और क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म है। साथ ही अमेज़ॅन दुनिया में Revenue द्वारा सबसे बड़ी इंटरनेट कंपनी है और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका (USA)  में दूसरा सबसे बड़ा एम्प्लायर है।

 

 

पर अगस्त में हुई फ्यूचर ग्रुप (Future group) के साथ रिलायंस (Reliance) की 3.4 बिलियन डॉलर डील को लेकर अमेज़ॉन इस सौदे का विरोध कर रही है। इस डील से अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन (Amazon) को तगड़ा झटका लगा है और साथ ही इस डील पर अमेज़ॉन ने नाराजगी भी जताई है।

 

 

यह सौदा फ्यूचर ग्रुप की होल्डिंग कंपनियों में से एक में हिस्सेदारी रखता है,जिस पर अमेज़ॉन ने आपत्ति जताई है,आपत्ति जताते हुए अमेज़ॉन ने यह आरोप लगाया है कि भारतीय फर्म ने अंदरूनी व्यापार (Insider Trading) और अनुबंधों (Contracts) का उल्लंघन किया है,जिसके कारण इस डील को मंजूरी ना दी जाए। अमेज़ॅन ने तर्क (Argument) दिया है कि फ्यूचर ग्रुप की होल्डिंग कंपनियों में से एक फ्यूचर कूपन (Future coupon) के साथ उसके कॉन्ट्रैक्ट के कारण भारतीय समूह को अपनी संपत्ति को रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) जैसी कॉम्पिटिटिव फर्म को बेचने से रोक दिया है।

 

 

हालाँकि गौरतलब कि बात यह है की रिलायंस समूह ने अगस्त में फ्यूचर ग्रुप के रिटेल , होलसेल ,स्टोरेज और लॉजिस्टिक कारोबार को एक्वायर (Acquire) करने के लिए 24,713 करोड़ रुपये का सौदा किया था,जिसको CCI द्वारा मंजूरी दे दी गयी है। इस खबर की जानकारी खुद CCI द्वारा ट्विटर पर शेयर की गयी थी, जिसके कारण यह सौदा अमेज़ॅन के लिए सर का दर्द बनता दिखाई दे रहा है।

 

 

पिछले महीने के अंत में, एक सिंगापुर अदालत (Singapore Court) ने दोनों समूहों (Groups) के बीच सौदे को टेम्पररी रूप (Temporary form ) से रोकने का आदेश जारी किया था। पर  CCI  द्वारा दिए गए आदेश के कुछ समय बाद, फ्यूचर ग्रुप और रिलायंस रिटेल “बिना किसी देरी के” अपना सौदा पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं ।

 

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