-रवि श्रीवास्तव, संवाददाता

जिदंगी एक ऐसा तोहफा जिसे किसी को देना आपके बूते की बात नहीं तो भला उसे लेने का हक आखिर आपको कौन देता है? अवसाद में आकर जिंदगी खत्म कर लेने वाला फैसला खुद कोई कैसे कर लेता है ,जबकी दूसरी तरफ जन्म देने से लेकर बड़ा होने तक में कई लोगों का योगदान होता है. खुशियों में जब आप सबको शरीक करते हैं,तो अपने दुखों में क्यों दूर हो जाते है.

ये सच हो सकता है कि आपके दुखों में कोई खुद शामिल नहीं होता तो खुशियों में भी तो न्योता देना पड़ता है. कोई आता है,कोई दूसरे कामों का बहाना देकर मुकर जाता है।ऐसे में क्यों चंद कोशिशों को कर हम इतना हताश परेशान हो जाते हैं कि सब कुछ खत्म करना ही एख मात्र रास्ता दिखता है.सुसाइड करने वालों की संख्या मौजूदा वक्त में बढ़ती जा रही है,लेकिन सवाल कि आखिर क्यों ?

मरने के बाद क्या होगा? कैसे होगा ये भी तो आप नहीं जानते तो फिर मौजूदा वक्त में जो जानते हैं.मझते है उससे जुड़ी सूझबूझ का इस्तेमाल क्यों नहीं करते? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गैनाइज़ेशन के आंकड़ों की मानें तो दुनिया में हर 40 सेकेंड में एक मृत्यु सूसाइड यानी आत्महत्या के चलते होती है. भारत की बात करें तो नैशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक़ पिछले 10 वर्षों में देशभर में सूसाइड के मामले 17.3 प्रतिशत तक बढ़े हैं. हर वर्ष 10 सितंबर को वर्ल्ड सूसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है ताकि आत्महत्या के कारणों को समझा जा सके और लोगों को आत्महत्या जैसा जानलेवा कदम उठाने से रोका जा सके.

बढ़ते सुसाइड पर रिसर्च करने पर पता चला है कि आमतौर पर जिन लोगों में खुद को समाप्त करने की भावना आती है, उनका सोचना होता है कि जिंदा रहने का कोई मतलब नहीं है.लोगों के मन में ये ख्याल तब आता है,जब वे नकारात्मक के विचारों से भरे होते हैं. उन्हें जीवन दुख से भरा लगता है. उनका मानना होता है कि इस दर्द से मुक्ति का आत्महत्या के अलावा कोई और रास्ता नहीं है. वे खुद को बेकार मानते हैं. धीरे-धीरे उन्हें लगने लगता है कि उनके आसपास के लोग उन्हें पसंद नहीं करते. कोई उनसे प्यार नहीं करता. वे महत्वहीन हैं. लेकिन ऐसा नहीं है.जमीन पर पड़ी घास का भी महत्व तो फिर हम इंसान है.हमारी अपील है कि जब भी ऐसे ख्याल आए तो एक बार ये जरूर सोचें कि आपके जाने के बाद कोई गरांटी नहीं कि सब ठीक ही हो जाएगा.क्या पता तकलीफें मरने के बाद भी हो,तो क्यों ना जीकर उनसे लड़े और जीतकर इस जीवन को जीना सीखे.

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