भगवान कार्तिकेय की सबसे बड़ी प्रतिमा, भारत नहीं, इस देश में है मौजूद

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-नीलम रावत, संवाददाता

दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को मुरुगन स्वामी के रूप में पूजा जाता है. दक्षिण में तो भगवान कार्तिकेय के विशाल और भव्य मंदिर मौजूद है. लेकिन, उनकी सबसे बड़ी प्रतिमा भारत में नहीं बल्कि मलेशिया में विराजमान है.

दरअसल मलेशिया में बाटू नाम की गुफाएं हैं जिनके प्रवेश द्वार पर भगवान कार्तिक की सबसे विशाल प्रतिमा मौजूद है. मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर से 13 किलोमीटर दूर ये गुफाएं मौजूद है. मलेशिया की पहाड़ियों में बहने वाली बाटू नदी के नाम पर इन गुफाओं का नाम पड़ा है.

बाटू गुफा मलेशिया में रहने वाले लाखों तमिल हिन्दुओं के लिए सबसे पवित्र तीर्थ है. गुफा के अंदर भगवान मुरुगन का मंदिर बना है. मुरुगन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं. इसके अलावा भी गुफा में बहुत से हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियां लगी हैं और कई छोटे मंदिर भी बने हैं.

भगवान कार्तिक की विशाल प्रतिमा

चूना पत्थर की ये प्राकृतिक गुफा करीब 40 करोड़ साल पुरानी है. पानी के कारण लगातार होते कटाव से इस तरह की गुफाएं बनती हैं. इस गुफा को सबसे पहले साल 1878 में अमेरिकी प्रकृति विज्ञानी विलियम होर्नाडे ने खोजा था.

गुफा की खोज के कुछ वर्ष बाद तमिल व्यापारी के. थम्बूसामी पिल्लै यहां आए. उन्हें गुफा के मुख्य द्वार का आकार भगवान मुरुगन के भाले के ऊपरी सिरे जैसा लगा. यही देखकर उनके मन में यहां मंदिर बनाने का विचार आया. 1891 में उन्होंने यहां भगवान मुरुगन की मूर्ति की स्थापना की.

धीरे-धीरे यह जगह मलेशिया में रहने वाले तमिल हिन्दुओं के बीच तीर्थ की तरह प्रसिद्ध हो गई. 1892 से यहां तमिल हिन्दूओं का त्योहार थाईपुसम मनाया जाने लगा. इसे त्योहार को जनवरी के आखिर या फरवरी के महीने की शुरुआत में मनाया जाता है.

 

मुरुगन के मंदिर तक पहुंचने के लिए 272 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. ऊपर पहुंचकर दिखाई देती है चूना पत्थर की बनी विशाल गुफा, जो करीब 100 मीटर ऊंची है.

मलेशिया आने वाले पर्यटक दुनियाभर में प्रसिद्ध इन गुफाओं में घूमना नहीं भूलते. मुरुगन स्वामी के भक्त तो दूर-दराज से यहां उनके दर्शन करने आते हैं.

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